कविता : सच्ची मित्रता

 

सच्ची मित्रता का हो, हृदय से उद्गम,
घनेरी छाया जिसकी कल्पवृक्ष समान,
बाल मैत्री सी उमंग तरंग,
द्वेष का ना कोई स्थान ।

वर्तमान उत्कर्षपूर्ण,
भविष्य की मनमोहक कल्पनाएँ चित में अविराम,
सरलता और मधुरता जिसमें,
विश्वास है अडिग, प्रह्लाद और विष्णु समान ।

क्षण भर में लगती हृदय से बाते,
दूजे हि क्षण मनोमालिन्य करे,
दुग्ध क्षीर को विभाजित करे,
ऐसी मित्रता हंस के समान ।

ना उमर, ना जात-पात,
ना भेद भाव की हो खोखली बंदिशे,
पथ प्रदर्शक हो,
बने सारथी जीवन का कृष्ण समान ।

ना रहे कामना कुछ पाने की,
सहानूभुति रहे मित्रता में,
बने प्रेम का पात्र,
राधा कृष्ण सा प्रेम, राम हनुमान भक्ति समान ।

*कवित्री श्रीमती कीर्ति जिंदल*

Leave a Comment

प्रभारी सचिव शिव प्रसाद नकाते ने की भिवाड़ी में जलभराव की समीक्षा, प्रदूषित पानी को खुले में छोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश, जिला प्रभारी सचिव ने आगामी मानसून को देखते हुए सीईटीपी एवं ड्रेनेज सिस्टम का किया निरीक्षण